“फांसीघर का विधानसभा से क्या लेना-देना?”: केजरीवाल और सिसोदिया का हाईकोर्ट में सवाल
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में कहा कि ‘फांसीघर’ का विधानसभा के कामकाज से कोई संबंध नहीं है। दोनों नेता विशेषाधिकार समिति के समन के खिलाफ हाईकोर्ट पहुँचे थे। यह मामला दिल्ली विधानसभा में बनाए गए ‘फांसीघर’ या ‘गैलोज़ हाउस’ से जुड़ा है, जिसकी वैधता पर सवाल उठाया गया है। इस मामले में विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने केजरीवाल और सिसोदिया को तलब किया था, ताकि वे इस संरचना की “प्रमाणिकता” पर अपनी बात रख सकें।
बुधवार को हुई सुनवाई में दोनों नेताओं की ओर से वरिष्ठ वकील शादन फरासत ने अदालत में कहा, “इस ‘फांसीघर’ का विधानसभा के विधायी कार्य से क्या लेना-देना है? बिल्कुल कुछ नहीं। अगर पिछली विधानसभा ने इस पर कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया था, तो वर्तमान विधानसभा इस पर कार्रवाई नहीं कर सकती। ”फरासत ने यह भी कहा कि पिछली विधानसभा (जो अब समाप्त हो चुकी है) द्वारा कोई लंबित प्रस्ताव नहीं छोड़ा गया था, इसलिए मौजूदा विधानसभा इस पर आगे नहीं बढ़ सकती। न्यायमूर्ति सचिन दत्ता की अदालत में दलीलें सुनी गईं। अदालत ने इस मामले पर विस्तृत सुनवाई गुरुवार को करने का निर्देश दिया है।
विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने दोनों नेताओं को गुरुवार को पेश होने के लिए कहा है, ताकि यह तय किया जा सके कि “फांसीघर” का निर्माण वैधानिक रूप से हुआ था या नहीं। जानकारी के मुताबिक, यह संरचना विधानसभा परिसर में पूर्व सरकार के समय तैयार की गई थी। समिति का कहना है कि इस पर खर्च किए गए धन और निर्माण की अनुमति की भी जांच की जानी चाहिए। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस समन को “राजनीतिक प्रतिशोध” बताया है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “यह मामला पूरी तरह से राजनीतिक है। फांसीघर जैसी चीज़ का विधानसभा के कामकाज से कोई लेना-देना नहीं। इसका मुद्दा उठाकर केवल हमारे नेताओं को परेशान किया जा रहा है।” अब सबकी निगाहें गुरुवार की सुनवाई पर टिकी हैं, जब केजरीवाल और सिसोदिया विशेषाधिकार समिति के सामने पेश होंगे। इस मामले से दिल्ली की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें कानूनी प्रक्रिया और राजनीतिक टकराव दोनों एक साथ सामने आ रहे हैं।