नोएडा में ऑटो चालकों की महापंचायत, एआरटीओ कार्यालय में कामकाज ठप

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-महीनेभर में कार्रवाई का आश्वासन, यूनियन ने कहा एक हफ्ते में दिखे असर

नोएडा। उप संभागीय परिवहन विभाग के कार्यालय परिसर के बाहर चार ऑटो एसोसिएशन और भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति की ओर से संयुक्त रूप से अपनी मांगों को लेकर महापंचायत बुलाई। इस दौरान सैकड़ों ऑटो के जरिए पूरे कार्यालय को घेर लिया गया। वहीं इसके चलते ट्रैफिक से लेकर परिवहन विभाग संबंधी कार्य भी प्रभावित हुए। हालांकि एक माह के आश्वासन के बाद महापंचायत समाप्त हुई।

शहर के सेक्टर 32 स्थित उप संभागीय परिवहन विभाग (एआरटीओ) कार्यालय के बाहर हुई महापंचायत की अगुवाई कर रहे अध्यक्ष ओम प्रकाश गुर्जर ने बताया कि उन्होंने आठ मांगे रखी हैं। इनमें से सबसे पहली मांग है कि ई-ऑटो और ई-रिक्शा के नए पंजीकरण पर रोक लगे। दूसरी मांग निजी वाहनों खासकर दो पहिया वाहनों के बढ़े कमर्शियल उपयोग पर कार्रवाई की जाए और उन पर रोक लगाई जाए। तीसरी मांग में उन्होंने विभाग व ट्रैफिक पुलिस द्वारा जब्त होने वाले वाहनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग रखी है। वहीं लाइसेंस और फिटनेस के कार्यों को निजी हाथों में न सौंपा जाए। दरअसल पदाधिकारियों का दावा है कि लाइसेंस बनवाने के लिए रुपयों की मांग की जाती है। इसके अलावा दिल्ली की तर्ज पर ही नोएडा में भी एक ही परमिट की व्यवस्था, एआरटीओ के स्थान पर आरटीओ कार्यालय स्थापित किया जाए। साथ ही पिक एंड ड्रॉप के लिए ऑटो स्टैंड बनाए जाने की मांग रखी है।

विभागीय कार्य हुए प्रभावित

सुबह शुरू हुई इस महापंचायत के चलते एआरटीओ कार्यालय के मुख्य द्वार को बंद कर दिया गया। हालांकि इस बीच अधिकारी व कर्मचारी अपने दफ्तर पर मौजूद रहे। लेकिन अधिकतर शहरवासी जो अपने कार्यों को लेकर विभाग पहुंचे वह या तो विभाग तक पहुंच नही सके, या फिर बंद दरवाजा देख लौट गए। जस तस किसी अन्य रास्ते से प्रवेश कर न मात्र लोग ही अपने कार्य करा सके।
जिले में ऑटो की संख्या को पछाड़ रहे ई-रिक्शा
सितंबर माह तक जिले में ई-रिक्शा की संख्या 26143 तक पहुंच गई हैं। जबकि जिले में सभी प्रकार के ऑटो की संख्या 27102 है। ऐसे में ई-रिक्शा ऑटो को पछाड़ने में सिर्फ 500 की दूरी पर ही हैं। ऐसे में ऑटो चालकों का कहना है कि ई-रिक्शा चालकों के लिए न तो कोई नियम और न ही कोई मानक बने हैं, लेकिन उनका पंजीकरण लगातार बढ़ता जा रहा है, जबकि ऑटो चालकों को अपने वाहनों का फिटनेस कराने समेत तमाम कार्यों के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है।

नोएडा में केवल 3,055 दोपहिया वाहन व्यावसायिक रूप से पंजीकृत

जिले में सितंबर माह तक सिर्फ 3055 दो पहिया वाहन ऐसे हैं जो व्यवसायिक वाहन के तौर पर पंजीकृत हैं। जबकि निजी दो पहिया वाहनों की संख्या 360745 यानी करीब 12 गुना ज्यादा है। लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अधिकतर वाहन व्यवसायिक गतिविधियों में लिप्त हैं, जिन पर वह कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

महीनेभर पर दो पहिया वाहनों पर चलेगा विभाग और ट्रैफिक पुलिस का चाबुक
एआरटीओ कार्यालय के परिसर में महापंचायत कर रहे ऑटो एसोसिएशन को विभाग और ट्रैफिक पुलिस की ओर से आश्वासन मिला है कि अगले एक माह पर ऐसे वाहन चालकों पर शिकंजा कसा जाएगा। इसी माह से इसका असर देखने को मिलेगा, इसके बाद प्रदर्शनकारी वहां से उठे।

समस्त ऑटो यूनियन की ओर से कुछ मांगे रखी गई हैं, जिन पर महीनेभर में असर देखने को मिलेगा, निजी वाहनों के कमर्शियल उपयोग पर विभाग और ट्रैफिक पुलिस संयुक्त रूप से शिकंजा कसेगी।

-नन्द कुमार, उप संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ), प्रशासन, गौतमबुद्ध नगर

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