बिहार की तेज़ रफ्तार: क्या घटा भारत के बाकी राज्यों से विकास का फासला?
बिहार एक बार फिर विधानसभा चुनाव की तैयारी में है, और इसके साथ ही एक बड़ा सवाल उठ रहा है क्या बिहार ने सच में भारत के बाकी हिस्सों से अपना विकास अंतर कम किया है? पिछले कुछ सालों में बिहार ने कई बार तेज़ आर्थिक वृद्धि दर दिखाई है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य की आर्थिक आधार (Economic Base) अभी भी छोटा है। इसलिए, जब बिहार की GDP या औद्योगिक वृद्धि तेज़ दिखती है, तो वह कभी-कभी छोटे बेस इफेक्ट (Small Base Effect) के कारण “भ्रमित करने वाली” भी हो सकती है।
हाल के वर्षों में बिहार की औसत वार्षिक वृद्धि दर कई बार देश के औसत से ऊपर रही है। कृषि और सेवा क्षेत्र ने इसमें अहम भूमिका निभाई है। हालांकि, उद्योग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर अब भी काफी पीछे हैं। जब बिहार की तुलना उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और केरल जैसे राज्यों से की जाती है, तो बिहार की प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) अभी भी सबसे कम में गिनी जाती है। बिहार में बड़े उद्योगों की कमी और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) की धीमी प्रगति, विकास में सबसे बड़ी बाधा हैं। बिजली, सड़क, और रोजगार जैसे क्षेत्रों में कुछ सुधार जरूर हुए हैं, लेकिन अब भी राज्य को निवेश आकर्षित करने में मुश्किल हो रही है।
बिहार सरकार ने अब औद्योगिक नीति, उद्यमिता को बढ़ावा, और शिक्षा व कौशल विकास पर जोर देना शुरू किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर राज्य अपने मानव संसाधनों का सही उपयोग करे, तो अगले कुछ वर्षों में यह विकास अंतर कम कर सकता है। कुल मिलाकर, बिहार ने दौड़ शुरू कर दी है, लेकिन मंज़िल अभी दूर है। विकास की रफ्तार तो तेज़ हुई है, पर बाकी भारत से बराबरी करने में अभी कुछ समय लगेगा।