विधानसभा 2025 चुनाव को लेकर क्या सोचते हैं: एनसीआर में रहने वाले बिहारी

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बिहार में 6 नवंबर को पहले चरण में कुल 121 विधानसभा सीट और 18 जिलों में वोटिंग शुरू हो गई है। इन सीटों में महागठबंधन के सीएम फेस तेजस्वी यादव राघोपुर सीट से और एनडीए गठबंधन से बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी तारापुर विधानसभा से चुनाव लड़ रहे हैं। इन दोनों सीटों में अंतर यह है कि राघोपुर सीट से तेजस्वी यादव 2 बार विधायक रह चुके हैं। लेकिन तारापुर विधानसभा सीट से सम्राट चौधरी पहली बार मैदान में हैं। इन दोनों के सामने जन सुराज के उम्मीदवार भी चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं बिहार की सबसे हॉट सीट में गिने जाने वाली मोकामा का भी माहौल गर्म है। जदयू से अनंत सिंह, राजद से वीणा देवी और जन सुराज पार्टी से प्रियदर्शी पियूष आमने-सामने हैं। बिहार में सबसे बड़ा मुद्दा है पलायन, रोजगार और शिक्षा, इस विचार को लेकर दिल्ली एनसीआर में रहने वाले बिहारी क्या सोचते हैं। यहां पर बैठ के वे बिहार की राजनीति पर तर्क लग रहे हैं। भले ही पार्टियों अपनी अपनी जीत का डंका बजाने में लगी हुई है लेकिन दिल्ली में रहने वाली बिहार वोटर अब जाति से हटकर विकास की राजनीति पर बात कर रहे हैं। यह जानने के लिए 2 दिन की ग्राउंड रिपोर्ट अंत तक पढ़े।

दिल्ली अशोक नगर गली नंबर 3 में एक 50 साल के व्यक्ति पान की दुकान लगाते हैं। उनके यहां रोजाना सैकड़ो लोग बिहारी पान का जायका लेने के लिए आते हैं। चाय और पान की बैठकी जब होती है तो वर्तमान की राजनीति पर लोग जरूर चर्चा करते हैं। बिहार के मधुबनी के रहने वाले मुकेश मंडल बताते हैं कि, 20 साल की राजनीति में नीतीश कुमार ने बिहार को कानूनी तौर पर तो मजबूत किया लेकिन पलायन, शिक्षा बेरोजगारी पर वह कुछ कर नहीं पाए। जो आस लेकर बिहारी उनको चार बार से मुख्यमंत्री बना रहे थे लेकिन उन्होंने उसे पूरा नहीं किया।

मुकेश मंडल की बात को काटते हुए अरुण पाठक बताते हैं कि अगर इस बार एनडीए की सरकार बनती है। सदियों से बनी इस समस्या को बीजेपी जरूर ठीक करेगी। वहीं दिल्ली एनसीआर में रहने वाले 50 प्रतिशत बिहार एनडीए को सत्ता में वापस करते हुए देख रहे हैं। उनका भरोसा है कि भाजपा सरकार उन पर मेहरबान होगी और रोजगार पलायन शिक्षा जैसे मुद्दों पर मजबूती से कम करेंगी। लेकिन उन लोगों को भी महागठबंधन पर थोड़ा सा कन्फ्यूजन जरूर है।

प्रशांत किशोर की जन सुरज पार्टी जिस तरीके से युवाओं में असर की है, शायद महिला और पुरुषों के दिल में घर नहीं बना पाई। कोचिंग और रोजगार की तलाश में आए जितनी भी युवा दिल्ली में रहते हैं, उन लोगों ने बातचीत में बताया कि हमारा सबसे बड़ा मुद्दा शिक्षा और बेरोज़गारी है। हमें जो पार्टी है आश्वासन देती है कि शिक्षा और रोजगार मिलेगा। हम लोग जाति और धर्म देखकर वोटिंग नहीं करेंगे। बल्कि उसे पार्टी को मजबूती से सत्ता में लेंगे और अपने बिहार का भविष्य सुनिश्चित करेंगे। इस बात पर यह विद्यार्थी बताते हैं कि जनसुरत पर उन लोगों को अच्छी उम्मीद है। लेकिन वह इस बार सत्ता में नहीं आ पाएगी।

वहीं धीरेंद्र पंडित नाम के व्यक्ति बताते हैं कि एनडीए की सरकार तो बनेगी। लेकिन नीतीश कुमार इस बार मुख्यमंत्री पद पर नहीं रहेंगे। उन्हें भाजपा किसी कारण हटाकर मुख्यमंत्री की कमान किसी और मजबूत नेता को देगी। भले ही चुनाव में वोटिंग की सर गर्मी उच्च स्तर पर है। नोएडा समेत दिल्ली एनसीआर में रहने वाले बिहारी इस बार बिहार चुनाव को लेकर बहुत एक्टिव है। बहुत से लोग बदलाव अभी चाहते हैं, और ज्यादातर एनडीए की सरकार पर आस लगाए हुए बैठे हैं।

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