दिल्ली दंगों का मामला: उमर खालिद और अन्य की जमानत याचिका पर दिल्ली सरकार ने दाखिल किया जवाब
नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने 2020 के दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश से जुड़े मामले में उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर अपना जवाब दाखिल किया है। सरकार ने कहा है कि इन आरोपियों के खिलाफ स्पष्ट और ठोस सबूत मौजूद हैं जो यह दिखाते हैं कि वे “देशभर में सांप्रदायिक आधार पर हिंसा फैलाने की साजिश” में गहराई से शामिल थे।
सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि यह साजिश न केवल हिंसा भड़काने के लिए थी, बल्कि देश की संप्रभुता और अखंडता पर सीधा प्रहार करने की कोशिश थी। इसमें आरोप लगाया गया है कि उमर खालिद ने “भीड़ को भड़काने, सांप्रदायिक सद्भाव को नष्ट करने और सशस्त्र विद्रोह की स्थिति पैदा करने” की योजना बनाई थी। दिल्ली सरकार ने कहा कि उनके पास प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, दस्तावेजी और तकनीकी साक्ष्य हैं, जो आरोपियों की इस साजिश में गहरी भूमिका को साबित करते हैं।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 27 अक्टूबर 2025 को सुनवाई स्थगित कर 31 अक्टूबर तक टाल दी है। अदालत में यह सुनवाई कार्यकर्ता शरजील इमाम, जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद और तीन अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर चल रही है। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने यह फैसला उस समय लिया जब दिल्ली पुलिस की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने हलफनामा दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा। इस मामले में आरोप है कि फरवरी 2020 में हुए दिल्ली दंगों से पहले इन आरोपियों ने संगठित तरीके से विरोध प्रदर्शनों का इस्तेमाल हिंसा फैलाने के लिए किया, जिसके चलते राजधानी में भारी जान माल का नुकसान हुआ था।
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