आरटीआई खुलासा: पिछले चार सालों में दिल्ली के 70% एनआईओएस कक्षा 10 के छात्र फेल

Share your love

दिल्ली सरकार के स्कूलों में नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS) प्रोजेक्ट के तहत पढ़ने वाले करीब 70 फीसदी छात्र पिछले चार सालों में 10वीं की परीक्षा में फेल हुए हैं। यह चौंकाने वाला आंकड़ा शिक्षा निदेशालय (DoE) द्वारा दी गई जानकारी में सामने आया है, जो पीटीआई द्वारा दायर एक आरटीआई आवेदन के जवाब में मिला। दिल्ली सरकार ने NIOS प्रोजेक्ट की शुरुआत इस उद्देश्य से की थी कि कक्षा 9 और 10 में फेल होने या पढ़ाई में कमजोर छात्रों को दोबारा मौका दिया जा सके, ताकि वे अपनी स्कूली शिक्षा पूरी कर सकें। इसके तहत छात्रों को अलग क्लासेस दी जाती हैं और NIOS बोर्ड के ज़रिए 10वीं पास करने का मौका मिलता है।

NIOS प्रोजेक्ट में स्कूल के प्रिंसिपल्स को पात्र छात्रों का रजिस्ट्रेशन करवाना होता है। छात्रों से हर विषय के लिए ₹500 परीक्षा शुल्क लिया जाता है, जबकि जिन विषयों में प्रैक्टिकल शामिल हैं जैसे पेंटिंग, होम साइंस या कंप्यूटर साइंस, उनमें ₹120 अतिरिक्त देने पड़ते हैं। पाँच विषयों के लिए कुल रजिस्ट्रेशन शुल्क ₹500 और हर विषय पर ₹200 अतिरिक्त लिया जाता है।

एक दिल्ली सरकारी स्कूल के शिक्षक ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि इतनी ज्यादा फेल होने की वजह कमज़ोर एकता और माता-पिता की भागीदारी की कमी है। उन्होंने कहा, “NIOS प्रोजेक्ट से जुड़े शिक्षक अक्सर पैरेंट्स से संपर्क नहीं रखते न हाज़िरी पर बात होती है, न बच्चों की पढ़ाई पर। कई छात्र अलग-थलग पड़ जाते हैं और उन्हें नियमित क्लासेस या गाइडेंस नहीं मिलती।” वहीं शिक्षा कार्यकर्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक अग्रवाल, जो ऑल इंडिया पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं, ने इस योजना की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, “यह बच्चों के भविष्य के साथ जुआ खेलने जैसा है। सरकारी स्कूल जानबूझकर कमजोर छात्रों को NIOS में भेज देते हैं ताकि उनके खुद के 10वीं बोर्ड रिजल्ट बेहतर दिखें।”

अग्रवाल के मुताबिक, “इनमें ज्यादातर बच्चे गरीब परिवारों से आते हैं और NIOS का पाठ्यक्रम सीबीएसई की तुलना में कमजोर है, जिससे उनके भविष्य के अवसर भी सीमित हो जाते हैं।”

Anjali Priya
Anjali Priya
Articles: 59

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Home
News
Videos
Audios
Work With Us