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हथकरघा की खूबसूरती से सजा कानपुर का फैशन शो, दिखी स्वदेशी विरासत

हथकरघा की खूबसूरती से सजा कानपुर का फैशन शो

Mediawali news, kanpur

कानपुर। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर रविवार को नगर निगम स्थित प्रमिला सभागार में आयोजित फैशन शो ने भारतीय कपड़ों की खूबसूरती और बुनकरों की मेहनत को एक अलग अंदाज में सामने रखा। रैंप पर जब मॉडलों ने हैंडलूम, खादी और सिल्क से तैयार परिधान पहनकर कदम रखा तो सभागार में मौजूद लोगों की नजरें उन पर टिक गईं। यह आयोजन केवल फैशन तक सीमित नहीं था। इसके पीछे प्रदेश के बुनकरों द्वारा तैयार किए जा रहे हथकरघा उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने और उन्हें नई पहचान दिलाने का उद्देश्य भी जुड़ा था।

मंत्री और महापौर ने किया शुभारंभ

कार्यक्रम का उद्घाटन हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग, खादी एवं ग्रामोद्योग तथा रेशम उद्योग मंत्री राकेश सचान और महापौर प्रमिला पाण्डेय ने किया। आयोजकों के मुताबिक फैशन शो के जरिए प्रदेश में तैयार हथकरघा वस्त्रों के प्रचार-प्रसार के साथ उनके विपणन और निर्यात की संभावनाओं को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम में विभागीय अधिकारियों के साथ बुनकरों, डिजाइनरों और शहर के गणमान्य लोगों ने भी हिस्सा लिया।

रैंप पर उतरी बुनकरों की मेहनत

फैशन शो की सबसे खास बात यह रही कि रैंप पर दिखाई देने वाले परिधान केवल डिजाइन का हिस्सा नहीं थे, बल्कि उनके पीछे प्रदेश के बुनकर परिवारों की मेहनत भी थी। प्रदेश के पुरस्कृत बुनकरों द्वारा तैयार हैंडलूम, खादी और सिल्क के परिधानों को मॉडल्स ने पहनकर प्रदर्शित किया। पारंपरिक बुनाई को आधुनिक डिजाइन के साथ जोड़कर तैयार किए गए कपड़ों ने दिखाया कि हथकरघा आज भी बदलते फैशन के साथ कदम मिला सकता है। संजना वर्मा, प्रज्ञा सिंह, यशविता सिंह, संचिता वर्मा, नैना गुप्ता, श्रृंखला सिंह, रिया श्रीवास्तव, वंशिका सिंह, मुस्कान सिंह, शुभम मिश्रा और तारिक अहमद सहित कई मॉडलों ने रैंप वॉक में हिस्सा लिया।

डिजाइनर ने बताईं परिधानों की खासियतें

फैशन शो के दौरान डिजाइनर कुंतानिल दास ने प्रदर्शित परिधानों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कपड़ों की डिजाइन, बनावट और उनमें इस्तेमाल की गई पारंपरिक बुनाई की विशेषताओं को दर्शकों के सामने रखा। परिधानों में भारतीय शिल्प की झलक के साथ आधुनिक फैशन की जरूरतों को भी ध्यान में रखा गया था। यही वजह रही कि कार्यक्रम में पारंपरिक कपड़ों को नए अंदाज में देखने का मौका मिला।

बुनकरों की आजीविका से जुड़ा है हथकरघा

मंत्री राकेश सचान ने कहा कि हथकरघा केवल कपड़ा तैयार करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की समृद्ध परंपरा और बड़ी संख्या में बुनकर परिवारों की आजीविका से जुड़ा हुआ है। उन्होंने लोगों से स्थानीय उत्पादों को अपनाने और स्वदेशी वस्त्रों को बढ़ावा देने की अपील की। उनके अनुसार स्थानीय उत्पादों को बाजार मिलने से बुनकरों को आर्थिक मजबूती मिलेगी और भारतीय वस्त्र उद्योग को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने में मदद मिलेगी। मंत्री ने कहा कि स्वदेशी उत्पादों का अधिक इस्तेमाल आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी मजबूत करता है। प्रदेश सरकार हथकरघा उत्पादों को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

स्वदेशी कपड़ों को मिले बाजार और सम्मान

महापौर प्रमिला पाण्डेय ने कहा कि विदेशी वस्त्रों के आकर्षण से आगे बढ़कर लोगों को स्वदेशी कपड़ों को प्राथमिकता देनी चाहिए। हथकरघा भारत की प्राचीन और गौरवशाली विरासत है, जिसे बचाए रखने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने कहा कि बुनकरों के उत्पादों को बाजार और समाज दोनों का सहयोग मिलना जरूरी है। कानपुर की अपनी हथकरघा परंपरा रही है और शहर इस विरासत को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

अधिकारियों और बुनकरों की रही मौजूदगी

कार्यक्रम में संयुक्त आयुक्त हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग पीसी ठाकुर, उप आयुक्त मनोज कान्त गर्ग, खादी ग्रामोद्योग महासंघ उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष सुरेश गुप्ता सहित विभागीय अधिकारी, बुनकर, वस्त्र डिजाइनर और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। फैशन शो के जरिए एक तरफ जहां रैंप पर भारतीय कपड़ों की चमक दिखाई दी, वहीं दूसरी ओर बुनकरों के हुनर और स्वदेशी वस्त्रों को आगे बढ़ाने का संदेश भी लोगों तक पहुंचा।

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