मीडिया वाली

Youtube Live
ब्रेकिंग न्यूज़
नवीनतम समाचार लोड हो रहे हैं...

मत्स्य पालन संग मोती उत्पादन, किसानों के लिए लाभ का नया रास्ता

Tags: ,
किसानों

20 लाख की लागत, 50 लाख का उत्पादन-तालाब बना खजाना

Mediawali news, कानपुर
खेत तालाब अब केवल सिंचाई और वर्षा जल संचयन तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने का सशक्त माध्यम बनते जा रहे हैं। जनपद के बिधनू विकासखंड के ग्राम सम्भुआ में एक खेत तालाब में मोती उत्पादन और मत्स्य पालन का अभिनव प्रयोग किया जा रहा है, जो क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन रहा है।
करीब 30 हजार सीपियों पर आधारित इस परियोजना में प्रति सीपी दो मोती तैयार किए जा रहे हैं। विशेष तकनीक के जरिए चयनित सीपियों में साँचे प्रत्यारोपित कर स्वस्तिक, भगवान गणेश, पुष्प और पत्तियों जैसी आकृतियों वाले डिजाइनर मोती तैयार किए जा रहे हैं। इस परियोजना की अनुमानित लागत 18 से 20 लाख रुपये है, जबकि तैयार मोतियों की बिक्री से लगभग 50 लाख रुपये तक आय होने का अनुमान है। साथ ही मत्स्य पालन से प्रतिवर्ष करीब चार लाख रुपये अतिरिक्त आय की संभावना है।

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत भूमि संरक्षण अनुभाग द्वारा ग्राम निवासी रश्मि वर्मा के खेत में 22 मीटर लंबा, 20 मीटर चौड़ा और तीन मीटर गहरा तालाब बनवाया गया। इस पर उन्हें 50 प्रतिशत अनुदान (अधिकतम ₹52,500) डीबीटी के माध्यम से दिया गया। कृषि विभाग और मणि एग्रो हब से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्होंने मोती की खेती शुरू की। वर्तमान में परियोजना को लगभग नौ माह पूरे हो चुके हैं और करीब 18 माह में मोती तैयार हो जाएंगे। इस परियोजना की खासियत यह है कि सीपियों में लगाए गए विशेष मोल्ड के अनुसार मोती परत दर परत बनते हैं, जिससे आकर्षक डिजाइनर पर्ल तैयार होते हैं, जिनकी बाजार में मांग और कीमत सामान्य मोतियों से अधिक होती है। वहीं सामान्य सीपियों से भी प्रति सीपी दो मोती तैयार कर उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा रही है।

परियोजना के साथ मत्स्य पालन को जोड़कर इसे और लाभकारी बनाया गया है। रश्मि वर्मा ने बताया कि उनके दूसरे तालाब में अब तक तीन बार मत्स्य उत्पादन किया जा चुका है, जिससे अच्छी आय प्राप्त हुई है। उन्होंने अन्य किसानों से भी अपील की कि वे खेत तालाबों का उपयोग केवल सिंचाई तक सीमित न रखकर मोती उत्पादन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों से जोड़ें। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि खेत तालाब जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और आय सृजन का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस नवाचार को अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाया जाए।

भूजल सप्ताह के अंतर्गत जिलाधिकारी ने एक फलदार पौधा रोपकर जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। साथ ही सभी खेत तालाबों की साफ-सफाई और उनके आसपास वृक्षारोपण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कार्यक्रम में उप कृषि निदेशक डॉ. आर.एस. वर्मा, जिला कृषि अधिकारी अरुणेश प्रताप सिंह सहित कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Home
News
Videos
Audios