IOC ने रूसी खिलाड़ियों पर से हटाया प्रतिबंध, लॉस एंजेलिस ओलंपिक 2028 का रास्ता हुआ आसान
Tags: IOC lifts ban on Russian Athletes, Los Angeles Olympics 2028, Russian Athletes, लॉस एंजेलिस ओलंपिक 2028 में रूस की वापसीMediawali news, delhi
रूस और बेलारूस के खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) ने संकेत दिए हैं कि रूसी खिलाड़ियों की अंतरराष्ट्रीय खेलों में वापसी का रास्ता अब पहले की तुलना में आसान हो सकता है। इस फैसले के बाद लॉस एंजेलिस ओलंपिक 2028 में रूस के खिलाड़ियों की भागीदारी की उम्मीद काफी बढ़ गई है। हालांकि खिलाड़ियों की वापसी पूरी तरह बिना शर्त नहीं होगी। IOC ने साफ किया है कि जिन खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना होगा, उन्हें तय नियमों और पात्रता शर्तों का पालन करना होगा।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद लगा था प्रतिबंध
फरवरी 2022 में रूस ने यूक्रेन पर सैन्य हमला शुरू किया था। इस युद्ध के बाद दुनिया भर में रूस की कड़ी आलोचना हुई। खेल जगत भी इससे अछूता नहीं रहा। युद्ध शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) ने सभी अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघों से अपील की थी कि वे रूसी और बेलारूसी खिलाड़ियों तथा अधिकारियों को अपनी प्रतियोगिताओं से बाहर रखें। इसके बाद एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, जिम्नास्टिक सहित कई खेलों में रूस के खिलाड़ियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इस फैसले का असर हजारों खिलाड़ियों के करियर पर पड़ा। कई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं, विश्व चैंपियनशिप और क्वालिफिकेशन टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले सके।
अब बदल रहा है माहौल
पिछले कुछ महीनों से IOC का रुख पहले की तुलना में नरम होता दिखाई दे रहा है। समिति का मानना है कि खिलाड़ियों को केवल उनके देश की राजनीतिक परिस्थितियों के कारण पूरी तरह खेलों से दूर रखना हमेशा उचित नहीं माना जा सकता। इसी सोच के तहत अब कई अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघ रूसी खिलाड़ियों को सीमित शर्तों के साथ दोबारा प्रतियोगिताओं में शामिल करने लगे हैं। हालांकि यह अनुमति केवल उन खिलाड़ियों को मिल रही है जो तय नियमों का पालन करते हैं और न्यूट्रल एथलीट (Neutral Athlete) के रूप में खेलने के लिए तैयार हैं।
न्यूट्रल एथलीट के तौर पर खेलेंगे खिलाड़ी
IOC की मौजूदा नीति के अनुसार कई रूसी और बेलारूसी खिलाड़ी अपने देश के झंडे, राष्ट्रीय गान या आधिकारिक प्रतीकों के बिना प्रतियोगिताओं में भाग ले सकते हैं। यानी खिलाड़ी व्यक्तिगत स्तर पर मुकाबला करेंगे, लेकिन रूस या बेलारूस का आधिकारिक प्रतिनिधित्व नहीं करेंगे। पदक जीतने की स्थिति में भी राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया जाएगा और राष्ट्रगान भी नहीं बजाया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य खिलाड़ियों को अवसर देना है, जबकि राजनीतिक विवादों से खेलों को अलग रखने की कोशिश भी जारी रहे।
लॉस एंजेलिस ओलंपिक 2028 पर पड़ेगा असर
IOC के इस फैसले का सबसे बड़ा असर लॉस एंजेलिस ओलंपिक 2028 की तैयारियों पर देखने को मिल सकता है। यदि अंतरराष्ट्रीय महासंघ इसी नीति को आगे बढ़ाते हैं, तो बड़ी संख्या में रूसी खिलाड़ी ओलंपिक क्वालिफिकेशन प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले सकेंगे।
रूस पारंपरिक रूप से जिम्नास्टिक, कुश्ती, तैराकी, तलवारबाजी, वेटलिफ्टिंग, एथलेटिक्स और कई अन्य खेलों में मजबूत देश माना जाता है। ऐसे में उनकी वापसी से अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का स्तर और प्रतिस्पर्धा दोनों बढ़ेंगे।
खिलाड़ियों और खेल संगठनों की अलग-अलग राय
IOC के इस फैसले पर दुनिया भर में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ देशों और खेल विशेषज्ञों का मानना है कि खिलाड़ियों को राजनीतिक विवादों की सजा नहीं मिलनी चाहिए। वहीं कई देशों का कहना है कि जब तक रूस-यूक्रेन संघर्ष पूरी तरह समाप्त नहीं होता, तब तक प्रतिबंध पूरी तरह हटाना उचित नहीं होगा। खेल संगठनों के बीच भी इस मुद्दे पर मतभेद बने हुए हैं। कुछ फेडरेशन खिलाड़ियों की वापसी के पक्ष में हैं, जबकि कुछ अभी भी कड़े प्रतिबंध जारी रखने के पक्षधर हैं।
आगे क्या होगा?
अब नजर IOC और अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघों के अगले फैसलों पर रहेगी। आने वाले महीनों में यह तय होगा कि किन खेलों में रूसी खिलाड़ियों को पूरी तरह वापसी की अनुमति मिलती है और किन प्रतियोगिताओं में अभी भी प्रतिबंध जारी रहेगा।
फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि रूस के खिलाड़ियों के लिए अंतरराष्ट्रीय खेलों के दरवाजे पहले की तुलना में काफी हद तक खुलने लगे हैं। यदि यही स्थिति बनी रही, तो लॉस एंजेलिस ओलंपिक 2028 में दुनिया एक बार फिर कई रूसी खिलाड़ियों को वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धा करते हुए देख सकती है।
6 महीने में टूटे 27 नेशनल रिकॉर्ड: भारतीय एथलेटिक्स में आखिर क्या बदल गया? जानिए सफलता की पूरी कहानी