नोएडा में एसबीआई के रिटायर्ड चीफ जनरल मैनेजर से 57.50 लाख की ठगी, सेक्टर-150 में प्लॉट दिलाने का दिया था झांसा
Tags: भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के सेवानिवृत्त चीफ जनरल मैनेजर से 57.50 लाख रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है।Mediawali news, noida
नोएडा। नोएडा के सेक्टर-150 में प्लॉट दिलाने के नाम पर भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के सेवानिवृत्त चीफ जनरल मैनेजर से 57.50 लाख रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है। पीड़ित की शिकायत पर एक्सप्रेसवे थाना पुलिस ने एक रियल एस्टेट कंपनी के सीईओ, सह निदेशक, सेल्स मैनेजर और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक विश्वासघात और धमकी देने समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पीड़ित का आरोप है कि आरोपियों ने खुद को प्रतिष्ठित रियल एस्टेट कंपनी का प्रतिनिधि बताकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्लॉट बेचने का सौदा किया और पूरी रकम लेने के बावजूद न तो प्लॉट का कब्जा दिया और न ही पैसा वापस किया।
दिसंबर 2024 में हुआ था प्लॉट खरीदने का सौदा
पुलिस के अनुसार, दिल्ली के सुखदेव विहार निवासी और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से सेवानिवृत्त चीफ जनरल मैनेजर सुभाष चंद्र ने शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि दिसंबर 2024 में एक रियल एस्टेट कंपनी के प्रतिनिधियों ने उनसे संपर्क किया था। आरोपियों ने उन्हें नोएडा के सेक्टर-150 स्थित एक परियोजना स्थल का भ्रमण कराया और दावा किया कि उनकी कंपनी आधुनिक सुविधाओं से युक्त आवासीय परियोजना विकसित कर रही है। इस दौरान आरोपियों ने स्वयं को कंपनी का सेल्स मैनेजर, ग्रुप हेड और निदेशक बताते हुए संबंधित भूखंड पर वैध मालिकाना अधिकार होने का भरोसा दिलाया।
57.50 लाख रुपये में तय हुआ था प्लॉट का सौदा
पीड़ित के अनुसार, आरोपियों ने सेक्टर-150 स्थित भूखंड का सौदा 57.50 लाख रुपये में तय किया। 26 दिसंबर 2024 को प्लॉट बिक्री से संबंधित एक एग्रीमेंट भी तैयार कराया गया। शिकायत के मुताबिक, उन्होंने अलग-अलग तिथियों में 21.75 लाख रुपये कंपनी के बैंक खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर किए। इसके अतिरिक्त 24.25 लाख रुपये नकद दिए गए। वहीं, शेष 11.50 लाख रुपये का चेक भी आरोपियों द्वारा बताए गए व्यक्ति के नाम पर जारी किया गया। इस प्रकार पीड़ित ने कुल 57.50 लाख रुपये का भुगतान कर दिया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें प्लॉट का कब्जा नहीं दिया गया।
टालमटोल के बाद सामने आया ठगी का मामला
पीड़ित ने बताया कि भुगतान के बाद जब उन्होंने प्लॉट पर कब्जा लेने का प्रयास किया, तो आरोपी लगातार अलग-अलग बहाने बनाकर उन्हें टालते रहे। बाद में जब उन्होंने स्वतंत्र रूप से संपत्ति के दस्तावेजों की जांच कराई, तो पता चला कि आरोपियों द्वारा किए गए दावे संदिग्ध थे और दिखाए गए दस्तावेजों की सत्यता पर भी सवाल खड़े हो गए। इसके बाद उन्हें एहसास हुआ कि उनके साथ योजनाबद्ध तरीके से धोखाधड़ी की गई है।
पैसा वापस मांगने पर दी गई धमकी
पीड़ित सुभाष चंद्र ने आरोप लगाया कि जब वह सेक्टर-135 स्थित कंपनी के कार्यालय पहुंचे और प्लॉट का कब्जा या अपनी रकम वापस करने की मांग की, तो आरोपियों ने उन्हें और उनके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। उन्होंने बताया कि पहले उन्होंने स्थानीय स्तर पर शिकायत दर्ज कराने का प्रयास किया, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने पुलिस आयुक्त से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की।
चार आरोपियों के खिलाफ दर्ज हुआ मामला
पुलिस ने अदालत के आदेश और पीड़ित की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है। जिन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है, उनमें ब्रिक एंड वॉल इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के सीईओ सौरभ अरोड़ा, सह निदेशक दीप वर्धन, सेल्स मैनेजर सोनू और खुशमीत वालिया शामिल हैं। इन आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, आपराधिक विश्वासघात और धमकी देने सहित विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है।
लेनदेन और दस्तावेजों की जांच में जुटी पुलिस
एक्सप्रेसवे थाना पुलिस का कहना है कि मामले में सभी वित्तीय लेनदेन, बैंक रिकॉर्ड, एग्रीमेंट और अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही है। साथ ही आरोपियों की भूमिका और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की सत्यता की भी जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस मामले ने एक बार फिर रियल एस्टेट निवेश से पहले दस्तावेजों और परियोजना की वैधता की गहन जांच कराने की आवश्यकता को उजागर किया है।