प्राकृतिक खेती से किसानों की बदली तस्वीर, सीएम योगी ने किया सम्मानित
Tags: प्राकृतिक खेतीकम लागत में ज्यादा मुनाफा, मल्टीलेयर फार्मिंग और देसी तकनीक बनी सफलता की कुंजी
Mediawali news, Kanpur
बिल्हौर चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) में आयोजित प्राकृतिक खेती कार्यक्रम में उन प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने बिना रासायनिक उर्वरकों के खेती कर न सिर्फ बेहतर उत्पादन हासिल किया बल्कि अन्य किसानों के लिए मिसाल भी पेश की है। इन किसानों की सफलता की कहानियां साबित करती हैं कि प्राकृतिक खेती से कम लागत में अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है।
बिठूर के आशीष ने 800 किसानों को जोड़ा
बिठूर क्षेत्र के पैगूपुर निवासी आशीष त्रिपाठी पिछले पांच वर्षों से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। ‘नमामि गंगे’ परियोजना के तहत जैविक खेती का प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने इसे अपनाया। वर्तमान में वे गेहूं और अरहर की फसल पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से उगा रहे हैं। जुलाई 2024 में उन्होंने ‘लवकुश फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी’ की स्थापना की और अब तक करीब 800 किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित कर चुके हैं।
शिवराजपुर के राजेश दे रहे प्रशिक्षण
शिवराजपुर के मुँहपोछा गांव निवासी राजेश कुमार त्रिपाठी बाजरा और मक्का की प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। वे आसपास के चार गांवों के करीब 150 किसानों को जैविक खाद बनाने और प्राकृतिक खेती की तकनीक का प्रशिक्षण दे रहे हैं।
फूल सिंह यादव का स्टार्टअप बना मिसाल
झींझक के जासापुर गांव निवासी फूल सिंह यादव पिछले लगभग दो दशकों से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। वे अपने खेतों में मिलेट्स और विभिन्न प्रकार की दालें बिना रसायन के उगाते हैं। खुद का स्टार्टअप चलाकर उत्पाद बाजार में बेच रहे हैं और अब तक 2000 से अधिक किसानों को इस मुहिम से जोड़ चुके हैं।
मल्टीलेयर फार्मिंग में आगे सुनील सिंह
बिल्हौर के भीटी हवेली निवासी सुनील सिंह मल्टीलेयर फार्मिंग के जरिए एक साथ कई फसलें उगा रहे हैं। मचान विधि से सब्जियों के साथ नीचे की परत में फूल व मसाले की खेती कर वे बेहतर आय अर्जित कर रहे हैं। साथ ही बड़े क्षेत्र में रसायन मुक्त फसल उत्पादन कर रहे हैं।
छोटे लाल ने तैयार किया मुनाफे का मॉडल
छोटे लाल दो एकड़ भूमि में मल्टीलेयर फार्मिंग कर बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं। वे एक ही खेत में कई फसलें उगाकर लागत घटा रहे हैं। उनका कहना है कि जीवामृत और घरेलू संसाधनों से होने वाली यह खेती सुरक्षित, कीटनाशक मुक्त और हर किसान के लिए लाभकारी है।कार्यक्रम में इन किसानों की उपलब्धियों को सराहा गया और अन्य किसानों से भी प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया गया।
किसानों का क्रम
1. सुनील सिंह
2.आशीष त्रिपाठी
3.फूल सिंह
4.राजेश
5.छोटे लाल