पूर्व जज मार्कंडेय काटजू ने बनाई ‘इश्क करो पार्टी’, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस, जानिए क्या है पूरा मामला
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देश की न्यायपालिका और राजनीति पर अपने बेबाक बयानों के लिए चर्चित रहने वाले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने किसी कानूनी मुद्दे पर टिप्पणी नहीं की है, बल्कि एक नई राजनीतिक पहल की घोषणा करके लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। काटजू ने ‘इश्क करो पार्टी’ नाम से एक नए संगठन का एलान किया है और युवाओं से इसमें शामिल होने की अपील की है।
उनकी इस घोषणा के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर बहस, प्रतिक्रियाओं और मीम्स की बाढ़ आ गई है। कुछ लोग इसे समाज में बढ़ती नफरत के खिलाफ सकारात्मक पहल बता रहे हैं, जबकि कई लोग इसे एक राजनीतिक व्यंग्य या मजाक के रूप में देख रहे हैं।
‘मेक लव नॉट वॉर’ से प्रेरित है पार्टी का विचार
मार्कंडेय काटजू ने अपनी नई पार्टी की घोषणा करते हुए कहा कि इसका आधार विश्व प्रसिद्ध नारा “Make Love, Not War” है। उनका मानना है कि वर्तमान समय में समाज और राजनीति में बढ़ते तनाव, नफरत और ध्रुवीकरण को कम करने के लिए प्यार, भाईचारे और आपसी सम्मान को बढ़ावा देना जरूरी है।
काटजू के अनुसार, उनकी पार्टी का उद्देश्य लोगों को जाति, धर्म, भाषा और राजनीतिक विचारधाराओं से ऊपर उठकर इंसानियत और प्रेम का संदेश देना है। उन्होंने खुद को पार्टी का संरक्षक बताया है और इच्छुक लोगों से ईमेल के माध्यम से संपर्क करने की अपील की है।
मृणाल पांडे को भी दिया पार्टी में शामिल होने का न्योता
अपनी घोषणा के साथ ही काटजू ने प्रसिद्ध लेखिका और वरिष्ठ पत्रकार मृणाल पांडे को भी पार्टी में शामिल होने का खुला निमंत्रण दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए अधिक से अधिक लोगों को इस विचारधारा से जुड़ना चाहिए।
हालांकि अभी तक मृणाल पांडे की ओर से इस प्रस्ताव पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सोशल मीडिया पर शुरू हुई प्रतिक्रियाओं की बौछार
‘इश्क करो पार्टी’ की घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ यूजर्स ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि आज के दौर में नफरत की राजनीति के बीच प्यार और सौहार्द का संदेश जरूरी है।
वहीं दूसरी ओर कई यूजर्स ने इसे लेकर मजाकिया टिप्पणियां भी कीं। मीम्स और व्यंग्यात्मक पोस्टों में पार्टी के संभावित घोषणापत्र, सदस्यता अभियान और चुनावी वादों को लेकर तरह-तरह की कल्पनाएं की जा रही हैं।
कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि क्या यह पार्टी वास्तव में राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएगी या केवल सोशल मीडिया तक सीमित रह जाएगी।
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ से हो रही तुलना
सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने ‘इश्क करो पार्टी’ की तुलना हाल के दिनों में चर्चा में रही ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) से भी की है।
कॉकरोच जनता पार्टी उस समय चर्चा में आई थी जब उसके सदस्यों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर कथित परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर प्रदर्शन किया था। हालांकि सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में फॉलोअर्स होने के बावजूद उस प्रदर्शन में अपेक्षाकृत कम लोग पहुंचे थे।
इसी संदर्भ में कुछ यूजर्स ने मजाक करते हुए ‘इश्क करो पार्टी’ को CJP का नया प्रतिद्वंद्वी बताया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए काटजू ने युवाओं से कहा कि वे “कॉकरोच वाली बातों” को भूलकर उनकी पार्टी से जुड़ें।
क्या यह केवल ऑनलाइन अभियान है?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ‘इश्क करो पार्टी’ वास्तव में एक राजनीतिक दल का रूप लेगी या यह केवल सोशल मीडिया पर चल रहा एक अभियान बनकर रह जाएगी।
अभी तक पार्टी का कोई आधिकारिक संगठनात्मक ढांचा, राष्ट्रीय कार्यकारिणी, सदस्यता प्रक्रिया या चुनावी रोडमैप सार्वजनिक नहीं किया गया है। यही कारण है कि कई राजनीतिक विश्लेषक इसे मौजूदा राजनीतिक माहौल पर एक व्यंग्यात्मक टिप्पणी के रूप में भी देख रहे हैं।
हालांकि काटजू ने संकेत दिए हैं कि पार्टी की आधिकारिक वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तैयार किए जा रहे हैं, जिससे भविष्य में इसकी गतिविधियां और स्पष्ट हो सकती हैं।
क्या राजनीति में नई बहस छेड़ पाएगी ‘इश्क करो पार्टी’?
मार्कंडेय काटजू की यह पहल फिलहाल चर्चा का विषय बनी हुई है। चाहे इसे गंभीर राजनीतिक प्रयोग माना जाए या सोशल मीडिया पर किया गया एक अनोखा प्रयोग, लेकिन इतना तय है कि इसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि ‘इश्क करो पार्टी’ केवल इंटरनेट की चर्चाओं तक सीमित रहती है या फिर वास्तव में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर कोई नई पहचान बनाने में सफल होती है।