मजदूरों के अकाउंट में अमीर व्यक्तियों से करते हैं ठगी

- नोएडा साइबर थाने की पुलिस ने कई ऐसे आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जोकि 50 हजार रुपये के बदले में लोगों के नाम पर बैंक खाता खुलवाते हैं।

Share your love
Mediawali news, Noida

दिल्ली एनसीआर में बैंक में आसानी से खाता खुलवाने के प्रोसेस का फायदा साइबर ठग नेटवर्क के अपराधी उठाने लगे हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से किसी ऐसे शख्स को टारगेट करते हैं। जिसे रुपये की जरूरत होती है। फिर उसे बैंक खाता उपलब्ध कराने की स्कीम बताई जाती है। झांसे में आया व्यक्ति ठगों के कहने पर मजदूर, ड्राइवर और मध्यम वर्गीय लोगों से संपर्क कर उन्हें 50 से 60 हजार रुपये का लालच देता है। बदले में उनके नाम पर बैंक खाते खुलवार, एटीएम कार्ड, पासबुक साइबर अपराधियों को दे दिए जाते हैं। जिसमें नोएडा समेत दिल्ली एनसीआर में शेयर ट्रेडिंग, डिजीटल अरेस्ट और अन्य ठगी की रकम की ट्रांसफर की जाती है। इस वजह से पुलिस मुख्य साइबर ठगों के पास पहुंच नहीं पाती है। मामले में खाता धारक पकड़े जाते हैं।

नोएडा सेक्टर 36 स्थित साइबर थाना पुलिस ने शनिवार को दिल्ली ऐसे ही एक कैब चालक को गिरफ्तार किया था। पुलिस जांच में सामने आया था कि आरोपी कैब चलाने के दौरान दिल्ली एनसीआर में लेबर चौक और अन्य स्थानों से लोगों से बातचीत करता था। उन्हें रुपये देकर बैंख खाते खुलवाने लगा। जिसे वह साइबर ठगों को देता था। आरोपी ने करीब 12 बैंक अकाउंट ठगों को उपलब्ध कराए थे। साइबर जांच अधिकारियों के अनुसार ठग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और टेलीग्राम के जरिए लोगों से संपर्क करते हैं। पहले दोस्ती की जाती है और फिर आसान कमाई का झांसा दिया जाता है। उन्हें बताया जाता है कि सिर्फ बैंक खाता खुलवाने या उसकी डिटेल देने के बदले मोटी रकम मिलेगी। कई लोग लालच में आकर तैयार हो जाते हैं। साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक कई बार जिन लोगों के खाते इस्तेमाल किए जाते हैं, उन्हें यह भी नहीं पता होता कि उनके खाते से करोड़ों रुपये का लेन-देन हो रहा है। लेकिन जब पुलिस जांच करती है तो सबसे पहले खाते के असली धारक पर ही कार्रवाई की जाती है। ऐसे में लालच में आकर बैंक खाता उपलब्ध कराने वाले लोग भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ जाते हैं।

क्या होता है म्यूल खाता

इसके बाद यह व्यक्ति अपने परिचित मजदूरों, ड्राइवरों और अन्य जरूरतमंद लोगों को बैंक खाता खुलवाने के लिए राजी करता है। बदले में उन्हें रुपये दिए जाते हैं। खाता खुलने के बाद एटीएम कार्ड, चेकबुक, मोबाइल नंबर और इंटरनेट बैंकिंग की पूरी जानकारी साइबर ठगों तक पहुंचा दी जाती है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऐसे खातों को साइबर अपराध की भाषा में म्यूल अकाउंट कहा जाता है। इन खातों का इस्तेमाल शेयर ट्रेडिंग में निवेश का झांसा देकर ठगी, डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन निवेश, लोन और अन्य साइबर अपराधों से वसूली गई रकम को ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। ठगी की रकम पहले इन खातों में आती है और फिर कई अन्य खातों में भेज दी जाती है, जिससे असली अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।

पुलिस की अपील

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक, ओटीपी या इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी न दें। थोड़े से पैसों के लालच में बैंक खाता देना भविष्य में बड़ी कानूनी परेशानी का कारण बन सकता है। यदि कोई व्यक्ति बैंक खाता खरीदने या किराये पर लेने का प्रस्ताव देता है तो इसकी सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस स्टेशन को दें।

Saurabh Yadav
Saurabh Yadav
Articles: 90

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Home
News
Videos
Audios
Work With Us