खेत तालाब में अब चमकेगा मीठे पानी का मोती, किसानों की होगी मोटी कमाई
कानपुर में शुरू होगी मोती पालन की नई पहल
Mediawali news, kanpur
उत्तर प्रदेश सरकार अब किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए खेती के साथ नई तकनीकों और व्यवसायों को जोड़ रही है। इसी कड़ी में कानपुर के किसानों के लिए मोती पालन यानी पर्ल फार्मिंग की नई योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत खेत तालाबों में मीठे पानी के मोती तैयार किए जाएंगे, जिससे किसानों को अतिरिक्त कमाई का बड़ा अवसर मिलेगा। सरकार ने कानपुर जिले में पहले चरण के लिए 15 खेत तालाबों का लक्ष्य तय किया है। खास बात यह है कि इस योजना में किसानों को तकनीकी सहायता से लेकर आर्थिक मदद तक सब कुछ उपलब्ध कराया जाएगा।
सरकार दे रही भारी सब्सिडी
मोती पालन योजना के तहत किसानों को लागत का 40 प्रतिशत तक सरकारी अनुदान मिलेगा। वहीं विशेष श्रेणी के लाभार्थियों को 90 प्रतिशत तक सब्सिडी देने का भी प्रावधान है। यदि किसान अपने खेत में नया तालाब बनवाना चाहते हैं तो सरकार तालाब खुदाई पर भी सहायता दे रही है। तालाब निर्माण के लिए लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम 52,500 रुपये तक की आर्थिक मदद दी जाएगी। इसके अलावा सिंचाई और पानी भरने के लिए पंपिंगसेट खरीदने पर भी 50 प्रतिशत या अधिकतम 15 हजार रुपये तक का अनुदान मिलेगा।
छोटे तालाब से होगी बड़ी कमाई
सरकार के अनुसार यदि किसान के पास 440 वर्ग मीटर का खेत तालाब है और उसमें सालभर कम से कम डेढ़ मीटर पानी रहता है, तो वह इस योजना का लाभ उठा सकता है। ऐसे तालाब में लगभग 2,000 सीप डाले जाएंगे। सीप खरीदने, उनकी सर्जरी, फीड और ऑक्सीजन व्यवस्था समेत कुल खर्च करीब 1.50 लाख रुपये आएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि 60 प्रतिशत सीप भी सुरक्षित रहते हैं, तो करीब 2,400 मोती तैयार हो सकते हैं। बाजार में एक मोती की कीमत कम से कम 100 रुपये तक होती है। इस हिसाब से कुल बिक्री लगभग 2.40 लाख रुपये तक पहुंच सकती है।
सभी खर्च निकालने के बाद किसान को करीब 90 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा हो सकता है।
एक्सपर्ट्स खुद करेंगे तकनीकी काम
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि किसानों को तकनीकी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। सीप की व्यवस्था, उनकी सर्जरी और न्यूक्लियस डालने का पूरा काम सरकारी विशेषज्ञों की देखरेख में कराया जाएगा। इससे किसानों को बिना ज्यादा तकनीकी ज्ञान के भी आसानी से मोती पालन करने का मौका मिलेगा।
मोती के साथ मछली पालन से डबल फायदा
मोती की अच्छी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए तालाब में रासायनिक पदार्थों और जहरीले कीटनाशकों का उपयोग पूरी तरह बंद रहेगा। इसका बड़ा फायदा यह होगा कि किसान उसी साफ पानी में मछली पालन भी कर सकेंगे। इससे किसानों की आय के दो स्रोत बन जाएंगे और उन्हें डबल फायदा मिलेगा।
ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन
इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को किसी सरकारी कार्यालय के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी। इच्छुक किसान आधिकारिक पोर्टल agriculture.up.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यदि तय लक्ष्य से ज्यादा आवेदन आते हैं, तो लाभार्थियों का चयन कंप्यूटर आधारित ई-लॉटरी के जरिए किया जाएगा। इससे चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहेगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह बैक-एंडेड योजना होगी। यानी काम पूरा होने और अधिकारियों द्वारा मौके पर सत्यापन के बाद सब्सिडी की राशि सीधे किसानों के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाएगी।
किसानों की आय बढ़ाने की बड़ी पहल
भूमि संरक्षण अधिकारी आर.पी. कुशवाहा ने बताया कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध खाली भूमि का सही उपयोग करना और किसानों की आय बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि कानपुर के प्रगतिशील किसानों के लिए यह योजना बेहद लाभकारी साबित हो सकती है। इसमें सरकार तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता सभी उपलब्ध करा रही है।
योजना की मुख्य बातें
- कानपुर में पहले चरण में 15 खेत तालाबों का चयन
- मोती पालन पर 40 प्रतिशत तक सब्सिडी
- विशेष श्रेणी को 90 प्रतिशत तक अनुदान
- तालाब खुदाई पर 52,500 रुपये तक सहायता
- पंपिंगसेट खरीदने पर 15 हजार रुपये तक छूट
- एक फसल में करीब 90 हजार रुपये तक शुद्ध मुनाफा
- ऑनलाइन आवेदन और ई-लॉटरी से चयन प्रक्रिया
- मोती पालन के साथ मछली पालन का भी मौका