मां और पत्नी घर पर करती रही आराम, उनके नाम पर कंपनी के खाते से 6 करोड़ का गबन
- रिश्तेदारों को फर्जी तरिके से बताया मजदूर और महीने की सैलरी उनके खातों में भेजते रहे
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नोएडा की एक निजी इंजीनियरिंग कंपनी में करोड़ों रुपये के कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। कंपनी के निदेशक ने आरोप लगाया है कि उनकी ही कंपनी के एचआर मैनेजर और अकाउंट्स से जुड़े कर्मचारियों ने अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ मिलकर करीब 6 करोड़ रुपये धोखाधड़ी की। यह रकम फर्जी मजदूरों और नकली भुगतान रिकॉर्ड के जरिए निकाली गई है। कोर्ट के आदेश पर मामले में फेज तीन थाने में 23 नामजद और अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज हुआ है।
सेक्टर-67 स्थित हिमकोन इंजीनियर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड डायरेक्टर धीरेंद्र कुमार सिंह ने पुलिस को बताया कि कंपनी में लंबे समय रोहतास नाम का व्यक्ति ड्राइवरी की नौकरी करता है। उसने डायरेक्टर से सिफारिश कर अपने बेटे सतेंद्र कुमार चौहान को साल 2015 में एचआर मैनेजर और अकाउंट्स पद में नौकरी लगवाई। वहीं कमल कुमार नाम का कर्मचारी भी अलग-अलग साइटों पर मजदूरों के वेतन और रिकॉर्ड संभालता था। डायरेक्टर का आरोप है कि दोनों ने मिलकर असली मस्टर रोल हटाकर फर्जी डिजिटल लेबर पेमेंट शीट तैयार कीं। इनमें ऐसे लोगों के नाम जोड़े गए, जो कभी कंपनी में काम ही नहीं करते थे।
बाद में इन्हीं फर्जी नामों पर लाखों रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किए जाते रहे। ऑडिट के दौरान खुलासा हुआ कि सिर्फ मार्च 2026 में ही करीब 3.42 लाख रुपये फर्जी खातों में भेजे गए। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी सतेंद्र कुमार चौहान ने अपनी मां मुकेश के खाते में साल 2018 से अब तक करीब 18 लाख रुपये ट्रांसफर किए, जबकि वह कभी कंपनी की कर्मचारी नहीं रहीं। आरोप लगाया गया है कि आरोपी अपनी पत्नी, रिश्तेदारों और परिचितों के नाम भी पीएफ रिकॉर्ड में जोड़ते रहे। साथ ही कंपनी ने कोर्ट को बताया कि फर्जी लेबर कार्ड, फर्जी भुगतान शीट और नकली दस्तावेज तैयार कर कई राज्यों में चल रहे प्रोजेक्ट्स से रकम निकाली गई। इसमें नोएडा, दिल्ली, बिहार, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश की साइटें शामिल हैं। जानकारी होने पर मैनेजर से पिछले महीने 24 अप्रैल को स्पष्टीकरण मांगा गया तो उसने गाली-गलौज की और पुलिस में शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी देकर भाग गया।
8-9 साल से चल रहा था गबन का खेल
आरोपी सतेंद्र कुमार चौहान और कमल कुमार ने कई साल तक कंपनी के असली मस्टर रोल में हेरफेर की। कंपनी की अलग-अलग साइटों से आने वाले मजदूरों के असली रिकॉर्ड हटाकर उनकी जगह फर्जी डिजिटल लेबर पेमेंट शीट तैयार की जाती थी। इन फर्जी शीटों में ऐसे लोगों के नाम जोड़े गए जो कभी कंपनी में काम ही नहीं करते थे। बाद में उन्हीं के नाम पर मजदूरी और वेतन दिखाकर रकम अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी। आरोप है कि इन खातों में आरोपी के परिवार, रिश्तेदार और परिचितों के खाते शामिल थे। कंपनी डायरेक्टर के मुताबिक इस पूरे खेल के जरिए कंपनी से लगभग 6 करोड़ रुपये का फर्जी भुगतान कराया गया।