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तमिलनाडु चुनाव 2026: एक युग का अंत! कोलाथुर में सीएम एम.के. स्टालिन की करारी हार

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Mediawali news, चेन्नई

तमिलनाडु की राजनीति में आज एक ऐसा भूचाल आया है जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। 2026 के विधानसभा चुनावों के नतीजों ने पूरे देश को चौंका दिया है। द्रविड़ राजनीति के कद्दावर नेता और निवर्तमान मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन (M.K. Stalin) अपनी पारंपरिक और सुरक्षित मानी जाने वाली सीट कोलाथुर (Kolathur) से चुनाव हार गए हैं। उन्हें अभिनेता विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेट्री कझगम’ (TVK) के उम्मीदवार वी.एस. बाबू ने एक कड़े मुकाबले में शिकस्त दी है।

चुनाव परिणामों का विश्लेषण:
मतगणना की शुरुआत से ही कोलाथुर सीट पर कांटे की टक्कर देखने को मिली। शुरुआती राउंड में स्टालिन आगे चल रहे थे, लेकिन दोपहर होते-होते TVK के वी.एस. बाबू ने बढ़त बना ली जो अंत तक कायम रही। आधिकारिक घोषणा के अनुसार, वी.एस. बाबू ने स्टालिन को एक सम्मानजनक अंतर से हराया है। यह हार इसलिए भी बड़ी है क्योंकि स्टालिन 2011 से लगातार इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।

राज्य का राजनीतिक परिदृश्य:
स्टालिन की हार के साथ ही DMK के किले में सेंध लग गई है। राज्य भर में अभिनेता विजय की पार्टी TVK ने ‘परिवर्तन’ की ऐसी लहर चलाई कि DMK और AIADMK जैसे स्थापित दल धराशायी हो गए। स्टालिन तमिलनाडु के चौथे ऐसे मुख्यमंत्री बन गए हैं जिन्हें पद पर रहते हुए अपनी ही विधानसभा सीट गंवानी पड़ी है।


कौन हैं वी.एस. बाबू? (V.S. Babu Profile)

वी.एस. बाबू अब रातों-रात तमिलनाडु की राजनीति के ‘जायंट किलर’ बन चुके हैं। उनके बारे में मुख्य बातें यहाँ दी गई हैं:

  1. राजनीतिक पृष्ठभूमि: वी.एस. बाबू पहले DMK का ही हिस्सा थे। वे कोलाथुर क्षेत्र में एक जमीनी स्तर के नेता के रूप में जाने जाते थे और स्टालिन के पूर्व करीबी सहयोगियों में से एक रह चुके हैं।
  2. TVK में शामिल होना: जब अभिनेता विजय ने अपनी पार्टी ‘तमिलगा वेट्री कझगम’ (TVK) की घोषणा की, तो बाबू DMK छोड़कर उनमें शामिल हो गए। विजय ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें सीधे मुख्यमंत्री के खिलाफ मैदान में उतारा।
  3. कोलाथुर के ‘लोकल’ नेता: बाबू की जीत का सबसे बड़ा कारण उनका कोलाथुर के स्थानीय निवासियों के साथ सीधा जुड़ाव माना जा रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने “स्थानीय उम्मीदवार बनाम वीआईपी उम्मीदवार” का मुद्दा जोर-शोर से उठाया था।
  4. रणनीति: उन्होंने स्टालिन के खिलाफ एंटी-इंकम्बेंसी (सत्ता विरोधी लहर) और युवाओं के बीच विजय की लोकप्रियता का बखूबी इस्तेमाल किया।

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