आईएमएस नोएडा में पत्रकारिता और डॉक्यूमेंट्री की नई सीमाएं पर वेबिनार का आयोजन
Mediawali news, Noida
आईएमएस नोएडा के स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन ने ‘पत्रकारिता और डॉक्यूमेंट्री की नई सीमाएं’ विषय पर वेबिनार का आयोजन किया। कार्यक्रम के दौरान बीबीसी न्यूज के वरिष्ठ पत्रकार, सहायक संपादक एवं मीडिया विशेषज्ञ खुशाल चंद लाली ने अपने अनुभव और विचार साझा किए। वेबिनार के दौरान आईएमएस नोएडा के सलाहकार प्रोफेसर (डॉ.) जे के शर्मा, कार्यक्रम संयोजक प्रोफेसर (डॉ.) सचिन बत्रा के साथ संस्थान के शिक्षक एवं छात्रों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करायी।
खुशाल चंद लाली ने मीडिया में महिलाओं की भूमिका और प्रतिनिधित्व पर गहन चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारतीय मीडिया अक्सर महिलाओं के दृष्टिकोण को नजरअंदाज कर देता है, जबकि जरूरत इस बात की है कि राजनीतिक और नीतिगत खबरों में यह भी दिखाया जाए कि उनका महिलाओं के दैनिक जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आज महिलाएं केवल लाइफस्टाइल या पेज-3 तक सीमित नहीं हैं, बल्कि खोजी पत्रकारिता, अंतरिक्ष रिपोर्टिंग और मुख्यधारा की एंकरिंग जैसे क्षेत्रों में भी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।
वेबिनार के दौरान विकासात्मक पत्रकारिता पर चर्चा करते हुए डॉ. सचिन बत्रा ने “नो निगेटिव मंडे” जैसी पहलों का उल्लेख किया और कहा कि मीडिया को केवल सनसनीखेज खबरों तक सीमित न रहकर समाधान आधारित और सकारात्मक खबरों को भी प्राथमिकता देनी चाहिए। वहीं खुशाल लाली ने पंजाब में आई बाढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि पत्रकारों को स्थानीय घटनाओं को वैश्विक परिप्रेक्ष्य, विशेषकर जलवायु परिवर्तन, से जोड़कर प्रस्तुत करना चाहिए।
ग्राउंड रिपोर्टिंग और पत्रकारों की सुरक्षा के मुद्दे पर विशेषज्ञों ने छात्रों को महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी विरोध-प्रदर्शन या संवेदनशील स्थिति में पत्रकार की व्यक्तिगत सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। रिपोर्टरों को सलाह दी गई कि वे घटनास्थल पर ऊँचे और सुरक्षित स्थान का चयन करें, जिससे वे स्थिति का बेहतर अवलोकन कर सकें और किसी भी अप्रिय घटना से बच सकें। साथ ही, पत्रकारों को प्रदर्शनकारियों की आवाज और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाए रखना चाहिए।
डिजिटल युग में पत्रकारिता की चुनौतियों पर चर्चा करते हुए बीबीसी के विशेषज्ञ ने सटीकता और नैतिकता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) जैसे सार्वजनिक स्वास्थ्य आंकड़ों के लिए सोशल मीडिया के बजाय वैज्ञानिक और प्रामाणिक स्रोतों पर भरोसा करना आवश्यक है। “फेक न्यूज” के बढ़ते खतरे पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि ‘सबसे पहले खबर देने’ की होड़ में कभी-कभी मीडिया संस्थान अपुष्ट सूचनाएं प्रसारित कर देते हैं, जिससे विश्वसनीयता पर असर पड़ता है।
कार्यक्रम के दौरान निजता और जनहित के संतुलन पर प्रकाश डालते हुए यह स्पष्ट किया गया कि जहां सार्वजनिक हित में पारदर्शिता आवश्यक है, वहीं संवेदनशील मामलों में पीड़ितों की पहचान की गोपनीयता बनाए रखना पत्रकारों की नैतिक जिम्मेदारी है। अंत में खुशाल चंद ने आइएमएस के प्रेसिडेंट राजीव कुमार गुप्ता का आभार व्यक्त किया और विभाग के प्राध्यापकों डॉ आशा, ललितांक जैन व अरुण कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन एमएजेएमसी की छात्रा सुदीक्षा तिवारी ने किया।