IPO का ‘शोर’ हुआ फीका: Innovision Limited की लिस्टिंग में 28% तक का झटका, निवेशकों का भरोसा डगमगाया
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टोल मैनेजमेंट और विभिन्न सेक्टर्स को मैनपावर सेवाएं देने वाली कंपनी Innovision Limited का आईपीओ निवेशकों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। आमतौर पर आईपीओ से निवेशक लिस्टिंग गेन की उम्मीद रखते हैं, लेकिन इस बार तस्वीर बिल्कुल उलट दिखी। कंपनी के शेयर ₹519 के इश्यू प्राइस के मुकाबले बीएसई पर ₹466 और एनएसई पर ₹467.70 पर लिस्ट हुए, जिससे शुरुआत से ही निवेशकों को करीब 10% का नुकसान झेलना पड़ा।
हालांकि असली झटका लिस्टिंग के बाद मिला। पहले ही दिन भारी बिकवाली के दबाव में शेयर लगातार टूटता गया और बीएसई पर ₹372.80 के लोअर सर्किट तक पहुंच गया। इस स्तर पर शेयर का बंद होना इस बात का संकेत है कि निवेशकों का भरोसा काफी कमजोर पड़ा है। पहले ही कारोबारी दिन के अंत तक आईपीओ निवेशक लगभग 28.17% के नुकसान में पहुंच गए, जो हाल के समय में कमजोर लिस्टिंग के बड़े उदाहरणों में से एक माना जा सकता है।
मार्च 10 से 17 के बीच खुले इस ₹319 करोड़ के आईपीओ को मिला-जुला रिस्पॉन्स मिला था। कुल मिलाकर यह इश्यू 3.46 गुना सब्सक्राइब हुआ, लेकिन इसमें भी असमानता साफ नजर आई। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) का हिस्सा 14.30 गुना भरा, जबकि नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 8.60 गुना सब्सक्राइब हुआ। इसके उलट, रिटेल निवेशकों की भागीदारी काफी कमजोर रही और उनका हिस्सा केवल 0.60 गुना ही भर पाया।
विशेषज्ञों के अनुसार, कमजोर रिटेल भागीदारी और लिस्टिंग के बाद की तेज बिकवाली इस बात की ओर इशारा करती है कि बाजार में इस आईपीओ को लेकर भरोसा पूरी तरह मजबूत नहीं था। यह मामला निवेशकों के लिए एक सीख भी है कि केवल सब्सक्रिप्शन के आंकड़ों के आधार पर निवेश का फैसला लेना जोखिम भरा हो सकता है।
कुल मिलाकर, Innovision Limited की लिस्टिंग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हर आईपीओ मुनाफे का सौदा नहीं होता और निवेश से पहले कंपनी के फंडामेंटल्स और बाजार की धारणा को समझना बेहद जरूरी है।