भारत में स्किल गैप बड़ी चुनौती: नौकरी हैं, पर योग्य उम्मीदवारों की कमी
Mediawali news
भारत की अर्थव्यवस्था पिछले चार दशकों में औसतन 6% की दर से बढ़ी है, लेकिन रोजगार के मामले में एक बड़ी समस्या सामने आ रही है। देश में नौकरियां तो बन रही हैं, लेकिन उनमें से कई अच्छी गुणवत्ता वाली नहीं हैं। इसका मतलब है कि लोगों को काम तो मिल रहा है, पर वह स्थिर, सुरक्षित और बेहतर वेतन वाला नहीं है।
पिछले कुछ वर्षों में रोजगार में लचीलापन बढ़ा है और 2022 में यह तेजी से बढ़ा भी, लेकिन यह बढ़ोतरी ज्यादातर कम गुणवत्ता वाली नौकरियों में देखी गई। खासकर कंस्ट्रक्शन सेक्टर में लोगों को काम मिला है, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में रोजगार की रफ्तार धीमी रही है। यह चिंता की बात है, क्योंकि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ज्यादा स्थिर और उत्पादक रोजगार देता है।
एक और समस्या यह है कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के कारण कम कुशल मजदूरों के लिए मौके कम हो रहे हैं। वहीं, कम उत्पादकता वाले सेवा क्षेत्रों में काम करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इससे अर्थव्यवस्था की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है।
भारत में एक बड़ा “स्किल गैप” भी है, यानी लोगों के पास जरूरी कौशल की कमी। देश में लाखों युवा बेरोजगार हैं, फिर भी कई नौकरियां खाली पड़ी हैं क्योंकि कंपनियों को योग्य उम्मीदवार नहीं मिलते। आंकड़ों के अनुसार, केवल 4.69% लोगों ने ही औपचारिक प्रशिक्षण लिया है। हर साल लगभग 1.2 करोड़ लोग वर्कफोर्स में जुड़ते हैं, लेकिन ट्रेनिंग देने की क्षमता सिर्फ 34 लाख लोगों की है। इसके अलावा, 85% से ज्यादा लोग अभी भी असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं।
इस समस्या का एक समाधान फॉर्मल स्टाफिंग इंडस्ट्री हो सकती है। ये कंपनियां लोगों को अनौपचारिक सेक्टर से निकालकर औपचारिक नौकरियों में लाने में मदद करती हैं। इससे उन्हें सामाजिक सुरक्षा, बेहतर कामकाजी माहौल और स्थिर आय मिलती है।
आज जरूरत है कि स्किल डेवलपमेंट की रफ्तार तेज की जाए। सरकार, कंपनियों और शैक्षणिक संस्थानों को मिलकर काम करना होगा ताकि युवाओं को बाजार की जरूरत के हिसाब से प्रशिक्षण दिया जा सके। तभी भारत अपनी युवा आबादी का सही फायदा उठा पाएगा और बेहतर रोजगार के अवसर पैदा कर सकेगा।